SAD SHAYARI :- Hello Dear User, In this time we found many person with broken heart, because in present time relationship are very weak, and one person left another person. So we provide you some heart broken and sad shayari for boys and girls. So let us see all shayari.


50+ Heart Broken And Sad Shayari For Boys And Girls





इश्क़ एक बहुत ज़हरीला जंगल है यारों
यहां सांप नहीं हमसफ़र डसा करते हैं।

जिंदगी मोहताज नहीं मंजिलों की,
वक्त हर मंजिल दिखा देता है,
मरता नहीं कोई किसी की जुदाई में,
वक्त सबको जीना सिखा देता है।

गुज़रना है तो दिल के अंदर से गुजरो,
मोहब्ब्त के शहर में बाईपास नहीं होते।

कलम और कागज की यारी पुरानी हैं,
कलम बिखेरती जाती हैं जज्बात,
कागज उन्हें संजीदगी से बटोरे रखता हैं।


धीरे से लबों पे आया है एक सवाल,
तू ज्यादा खूबसूरत है या तेरा ख़्याल..।

तुम्हारी नजाकत भरी बाते,
मुझे काफी उलझा देती हैं।
तुम्हारी मुहोब्बत में चूर नजरें,
मुझे काफी सहमा देती हैं।
तुम्हारी दिलकश अदाएँ,
मुझे तुमसे लिपटी रखती हैं।
तुम्हारी हर शरारत भरी हरकत,
मुझे सिर्फ तुम्हारी बनाए रखती हैं।


किस बात पर तेरा मिजाज इतना बदल- सा गया है,
क्या कोई खता हुई है हमसे या फिर तेरा किसी और पे दिल आ गया 

खुशियों की आरज़ू मे मुक़द्दर सो गये,
आँधी ऐसी चली कि अपने भी खो गये,

क्या खूब था उनका अंदाज़-ए-मोहब्बत, 
प्यार देने आए थे और पलकें भिगो कर चले गये।


Jaya karo gareebo ki basti me kabhi kabhi

Kuch bhi nahi to sukar e khuda  sikh jauge


तमाम अल्फ़ाज़ तेरे बिना बेमतलब हैं,
चंद कहानियाँ तेरे बिना अधूरी रहीं!!


दिल तो था ही नहीं मेरे पास,
जो टूटा वो भरोसा था मेरा.!!


Shaq nahi yeken he 

Koi kisi ka nahi hota


Wo kehta tha muje pasnd he muskuraahat Teri

Haye murshid fir le gya chhin kar 🥺


चैत के महीने में भी,
वो अपनी मर्जी से बरसता हैं।
मुक्कमल हो ही जाए उनको उनकी मुहोब्बत,
या खुदा तुझे तेरे शहर का वास्ता हैं।



कभी भी प्रेम विवाह न करे ।

आज पड़ोसन अपने पति से 
लड़ते हुए बोल रही थी 
कुत्ते तू ही मेरे पीछे पड़ा था ।


पल दो पल की मुलाकात कर लो 
इससे पहले की शहर में फिर लॉकडाउन लग जाये ।


है कोई यहां जो करेगा रफूगरी मेरी,
इश्क खा गया है जगह-जगह से मु

इश्क़ मुक्कमल होने ही वाला था,
की कमबख्त नींद ने धोखा दे दिया।



किसी के खामोश हो जाने पर होने वाली बेचैनी भी प्यार है ..
और किसी का खामोश हो जाना भी
प्यार है।


किताब ए इश्क़ में क्या कुछ दफ़्न मिला, 
मुड़े हुए पन्नों में एक भूला हुआ वादा मिला !!


अधूरा हूं तुम्हारे बिना मैं तो पूरे तुम भी नहीं,
अगर हूं मैं सच तो ख्वाब तुम भी नहीं

कोई अधूरी ना रहे दुआ किसी की,
सबके लिए ऐसा मुबारक रमजान हो।


दूर तो कर दिया हैं...!!
अलग कर पाओगे क्या ?


वक़्त बहुत कम हैं,
थोड़ा वक्त निकाल लिया करो।
वक़्त के अपने रुतबे हैं,
फुरसत का लालच इसे ना दिखाया करो।



आज आईने को मैंने जलता हुआ देखा,
जबसे तुम्हारे आँखोंमें देखा, मैने खुदको आईने में नही देखा।



देखी जो नब्ज़ मेरी तो हंस कर बोला हकीम,
कि तेरे मर्ज का इलाज़ महफ़िल है दोस्तों की।

उसका मेरी और देखना,
मेरा आंखे चुराना,
उसका मुझ पर हसना,
मेरा दिल से खुश होना,
उसका मुझसे मिलना,
मेरा धड़कनों को संभालना,
उसका मुझपे गुस्सा करना,
मेरा दिल मे सेहम जाना,
उसका मुझसे लड़ाई करना,
मेरा दिल में खोने का डर जागना,
उसका मुझसे रूठ जाना,
मेरा उसको मनाना,
उसका मुझसे प्यार करना,
मेरा उसपे दिल हार बैठना....

हा यही तो कहानी है मेरी ओर मेरे हमसफ़र की।



वो जो मरने पर तुला है,
उसने जी कर भी तो देखा होगा.!!

Ek bar tum meri ho kar to dekho

Ase hifazat kruga  jese rozedar karta he roze ki


कहा जमींदारोंसे उलझते हो कारीगरों,
जीते जी नही सही,पर मौत के बाद जरूर दो गज जमीन तुम्हारे नाम होगी।


मैं मुसाफिर हूँ,
तुझमे ही सफर करता रहूँ,
यही हैं आरजू मेरी।
मैं मुसाफिर हूँ,
मंजिल तक कभी जा ही ना पाऊं,
यही हैं तमन्ना मेरी।
मैं मुसाफिर हूँ,
तेरी ही राहोंपर भटकता रहूँ,
यही हैं चाहत मेरी।
मैं मुसाफिर हूँ,
तेरी ही पनाहोमे जिंदगी गुजार दू,
यही हैं ख्वाहिश मेरी।



तलब सी होगयी हैं लगता हैं अब मुझे,
तुमने कुछ इसकदर मुझे अपनी बनाया हैं।



मैंने पूछा इश्क़ करते हो? कितना ?
उसने कहा आसमां का विस्तार हैं जितना।
मैंने पूछा इंतजार करलोगे? कैसे ?
उसने कहा चातक जैसे करता हैं इंतजार बारिश का।



तसव्वुर तक मुझसे खफा खफा से हैं,
एक वही जरिया था तुमसे मिलने का।



मुहोब्बत का अंजाम इतना हसीन हुआ कि हम शायरी करने लगे,
ये जो अब हम अल्फाजोंमे पिरोते हैं, जी हाँ   दिल- शिगाफी ही हैं।


आज मेरे यार ने मुझे महफ़िल में बुलाया हैं,
लगता हैं नया तरीका ढूंढ लिया हैं हमें चोट पहुँचानेका।



अब ना ही रोक ए वाइज़ मुझे मयख़ाने जाने से,
मुहोब्बत नामका लजीज गुनाह किया हैं मैंने।


कुदरत की हसीन बनावट हैं इश्क़,
खुदा की खूबसूरत इनायत हैं इश्क़,
ना तू उसे जिस्मफिरोशी से तोल,
जिस्म से बहुत दूर हैं इश्क़।


उसके बालोंने तो आज सिमा ही लांघ दी,
मेरे महबूब के गालोंपर जो तिल हैं उसे चूमकर।


मेरी कीमत कोई और लगाता है,
और बिक जाता हूँ मैं.!!


वफ़ा  की आस  में दिल  दे  के  पछताया  नहीं  करते,
ये नख़्ल-ए-आरज़ू है इस में फल आया नहीं करते..!

तुम्हारी ख़ैरियत पूछूँ तो आख़िर किससे पूछूँ,
कोई दोस्त भी नहीं तुम्हारी तरफ़ का मेर

लौट आया हूँ फ़िर से अपनी उसी दस्त तन्हाई में,
ले गया था कोई अपनी महफिलों का  लालच दे कर।


Mohbbat karna itna asan nhi he saheb

Kai bhuto se ladna padta ek chudel ke liye😝


जिंदगी बड़ी अजीब सी हो गयी है,
जो मुसाफिर थे वो रास नहीं आये,
जिन्हें चाहा वो साथ नहीं आये।

सिखा दिया दुनिया ने मुझे अपनों पर भी शक करना,
मेरी फितरत में तो गैरों पर भी भरोसा करना था ।


कागज पर गम को उतारने के अंदाज़ ना होते

मर ही गये होते अगर शायरी के अल्फाज़ ना होते

मुहोब्बतोंके शहर में जाना हुआ तो मेरा एक संदेश ले जाना,
कही किसी गली में कोई एक मुसाफिर अपनी मुहोब्बत सेक रहा होगा उसे मेरा मेहबूब बता जाना।



आज कल की मुहोब्बत का फ़साना......

एक नही तो दूजा सही,
सूरत नही तो पैसा सही,
पैसा नही तो कोई और सही,
मुहोब्बत नही तो कारोबार ही सही।

तू समझता है कि जीने की है ख़्वाहिश मुझको,
मैं तो इस आस पे ज़िन्दा हूँ कि मरना कब है....!!

किसी के अंदर प्रेम जगाकर उसे छोड़ देना,
उसकी  हत्या  करने के बराबर होता है..!!